मुजफ्फरपुर। मिशन आई इंटरनॅशनल सर्विस एवं बिहार महिला समाख्या सोसाईटी के तत्वावधान में ८ मई से दो दिवसीय मीडिया ट्रेनिंग मॉड्यूल निर्माण के लिए कार्यशाला आयोजित की गयी। इस कार्यशाला में महिला समाख्या एवं अप्पन समाचार के २० प्रतिभागियों ने हिस्सा लेंगे। महिला समाख्या की जिला कार्यक्रम समन्वयक पूनम कुमारी, विशेषज्ञ के रूप में चरैवेति टाईम्स के संपादक डॉ प्रकाश पंचम एवं अप्पन समाचार के प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर अमृतांज इन्दीवर, राजेश कुमार ने अपना बहुमूल्य विचार दिया। प्रतिभागियों में अप्पन समाचार की रिंकू कुमारी, पिंकी कुमारी, महिला समाख्या की किरण वर्मा, शुभम मिश्रा, वीणा कुमारी, रूबी गुप्ता, रेणुका, सुधा सिन्हा, नीतू कुमारी, रौशन जबी, चांदनी, पिंकी, नेहा बानो, मधु, मनीषा, प्रीति, कविता आदि शामिल थीं।
शुक्रवार, 10 मई 2013
गुरुवार, 2 मई 2013
चरखा की ओर से मीडिया वर्कशॉप
मुजफ्फरपुर के पारू प्रखंड स्थित रामलीला गाछी में चरखा एवं मिशन आई इंटरनॅशनल सर्विस की ओर से ३० अप्रैल से ५ दिवसीय मीडिया वर्कशॉप का आयोजन किया गया। अप्पन समाचार से जुडी ग्रामीण महिला पत्रकारों में सामाजिक व महिला मुद्दों की एवं न्यूज की समझ बढ़ाने के उद्देश्य से यह कार्यशाला आयोजित की गयी है। प्रथम दो दिन पंचायतनामा से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र ने प्रतिभागियों को ट्रेनिंग दी। २ मई को टीम ने पारू प्रखंड के नेकनामपुर गॉव एवं गोखुल स्थित विलियम प्रोजेक्ट एवं मुशहर बस्ती में सामाजिक काम, गरीबों की दशा, शिक्षा, स्वास्थ्य, शौचालय आदि योजनाओं की पड़ताल की। अंत में प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से मुलाकात कर विभिन्न योजनाओं में हो रही गड़बड़ियों के बारे में बताया। बीडीऒ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीईओ को तलब कर शीघ्र कार्रवाई करने को कहा। चरखा, दिल्ली से आये शम्स तमन्ना लगातार प्रतिभागी को प्रशिक्षित कर रहे हैं। रिंकू कुमारी, खुशबू कुमारी, पिंकी कुमारी, अनीता कुमारी, जुबेहा खातून, सविता कुमारी, प्रियंका कुमारी, रेनू कुमारी समेत एक दर्जन लड़कियाँ मीडिया कार्यशाला में शामिल हुई हैं। इस दौरान अप्पन समाचार के संतोष सारंग, अमृतांज इन्दीवर, पंकज सिंह, फूलदेव पटेल, नितीश कुमार, विनोद जायसवाल, आदि मौजूद रहे।
| ट्रेनिंग देते पंचायतनामा से जुड़े वरिष्ट पत्रकार पुष्यमित्र व चरखा के शम्स तमन्ना |
सोमवार, 1 अप्रैल 2013
Santosh Sarang selected for SACCA Fellowship 2013
अप्पन समाचार के संस्थापक संतोष सारंग को पैनोस साउथ एशिया ने "साउथ एशियन क्लाईमेट चेंज अवार्ड फेलोशिप 2013" के लिए चुना है। इस वर्ष यह फेलोशिप दक्षिण एशिया के 6 देशों के विकासपरक व पर्यावरण पर लिखने वाले 24 पत्रकारों को दिया जा रहा है। श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, भारत एवं पाकिस्तान के पत्रकारों का चयन किया गया है। भारत से 8 पत्रकारों को चुना गया है। दक्षिण एशियाई देशों के पत्रकारों को पर्यावरण के मसले पर सघन कार्य करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है. संतोष सारंग अप्पन समाचार नामक एक ग्रामीण मीडिया समूह का संचालन करते हैं. देश-विदेश में मशहूर इस प्रयोग की सराहना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होती रही है. संतोष सारंग फ़िलहाल प्रभात खबर के लिए भी सेवा दे रहे हैं। 2008 में संतोष सारंग को सीएनएन-आईबीएन समूह ने अप्पन समाचार के लिए "सिटीजन जर्नलिस्ट अवार्ड" से सम्मानित किया था।
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Santosh Sarang, a Journalist & Social Activist is selected for South Asian Climate Change Award (SACCA) Fellowship 2013. Presently, he is working as a Sub-Editor in Hindi newspaper Prabhat Khabar, Muzaffarpur edition. Santosh Sarang is the Founder of Appan Samachar (an all-women news channel.). CNN-IBN group awarded him the prestigious award "Citizen Journalist Award" in 2008 and Bihar Rajya Anuvrat Shikhak Sansad awarded the "Anuvrat Samman" in 2004 for the best relief work during flood. Santosh also writes script & anchors for the programmes "Prayavaran Darshan", "India Innovates" & "Goan Ghar" of Doordarshan Patna. He worked in North-East hindi leading newspaper "Purvanchal Prahari" as a Sub-Editor, as a Senior Correspondent in monthly magazine "Time Pass". About 200 articles, published in Dainik Hindustan, Dainik Jagran, Prabhat Khabar, Aaj, Punjab Kesari, Navbharat Times, Sandhya Prahari, Sopan Step etc. Santosh Sarang born on 05 October 1973 at Kalapahad in Vaishali district, Bihar. He established a trust "Mission Eye International Service" for social cause. The dream project of Santosh is "Azad Nirman Asharam", an orphanage project.
सोमवार, 25 मार्च 2013
अप्पन समाचार को जानने पहुंची केंद्रीय विश्वविद्यालय की टीम
केंद्रीय विश्वविद्यालय, पटना बिहार की २२ सदस्यीय टीम २२ मार्च को पटना से मुजफ्फरपुर पहुँची। सहायक प्रोफ़ेसर सुजीत कुमार और दीक्षा चमोला के नेतृत्व में २० छात्र-छात्राएं अप्पन समाचार के बारे में जानने आये थे. इस टीम में पत्रकारिता व जनसंचार और विकास अध्ययन विभाग के छात्र-छात्राएं शामिल थे. २२ मार्च को मुजफ्फरपुर में दिनभर का सेशन चला, जिसमें कम्युनिटी मीडिया बनाम कॉरपोरेट मीडिया पर चर्चा चली। इस दौरान अप्पन समाचार परिकल्पना, उसके सफ़र, प्रभाव आदि के बारे में भी खुलकर बातें हुईं। अप्पन समाचार के संस्थापक संतोष सारंग ने छात्र-छात्राओं को अप्पन समाचार के अलावा पत्रकारिता में आनेवाली नई पीढ़ी के सामने आ रही चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया। दैनिक जागरण के एम् अखलाक, अप्पन समाचार के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर अमृतांज इंदीवर, आनंद मूर्ति, के नीरज, हेमनारायण विश्वकर्मा ने भी संबोधित किया।
शाम में टीम मुशहरी के मणिका गाँव जाकर प्रख्यात समाजवादी चिन्तक व लेखक सच्चिदानंद सिन्हा से मिलकर करीब डेढ़ घंटे गाँव व पत्रकारिता पर बात की। छात्रों ने अपनी जिज्ञासाएं मिटाई।
२३ मार्च को यह टीम पारू प्रखंड के चान्दकेवारी गाँव पहुंची। वहां अप्पन समाचार टीम की लड़कियों, ग्रामीणों के साथ घंटों बैठकर अप्पन समाचार की गतिविधियों पर चर्चा की। दोनों टीमों ने अपने-अपने अनुभव बाँटें। फिर केंद्रीय विश्वविद्यालय की टीम के छात्र-छात्रों ने तीन समूह में बंटकर गाँव के तीन टोलों में जाकर अप्पन समाचार के काम, उसके प्रभाव पर सर्वे किया। अंत में सर्वे से छनकर आई बातों पर चर्चा की गयी। पटना से आई टीम ने बताया कि अप्पन समाचार की फ्रिक्वेंसी बढ़ाने की जरूरत है। इसे घर-घर तक पहुँचाना होगा।
इस मौके पर अप्पन समाचार की रिंकू कुमारी, खुशबू कुमारी, पिंकी, अनीता, रेनू, प्रियंका, ममता, जुबेहा खातून, अमृतांज इन्दीवर, राजेश कुमार, पंकज सिंह, फूलदेव पटेल, नीतीश कुमार, शम्भू सिंह, चान्द्केवारी के मुखिया विनोद साह, सकलदेव दास, संजय कुमार, हसरत अली आदि मौजूद थे.
शाम में टीम मुशहरी के मणिका गाँव जाकर प्रख्यात समाजवादी चिन्तक व लेखक सच्चिदानंद सिन्हा से मिलकर करीब डेढ़ घंटे गाँव व पत्रकारिता पर बात की। छात्रों ने अपनी जिज्ञासाएं मिटाई।
२३ मार्च को यह टीम पारू प्रखंड के चान्दकेवारी गाँव पहुंची। वहां अप्पन समाचार टीम की लड़कियों, ग्रामीणों के साथ घंटों बैठकर अप्पन समाचार की गतिविधियों पर चर्चा की। दोनों टीमों ने अपने-अपने अनुभव बाँटें। फिर केंद्रीय विश्वविद्यालय की टीम के छात्र-छात्रों ने तीन समूह में बंटकर गाँव के तीन टोलों में जाकर अप्पन समाचार के काम, उसके प्रभाव पर सर्वे किया। अंत में सर्वे से छनकर आई बातों पर चर्चा की गयी। पटना से आई टीम ने बताया कि अप्पन समाचार की फ्रिक्वेंसी बढ़ाने की जरूरत है। इसे घर-घर तक पहुँचाना होगा।
इस मौके पर अप्पन समाचार की रिंकू कुमारी, खुशबू कुमारी, पिंकी, अनीता, रेनू, प्रियंका, ममता, जुबेहा खातून, अमृतांज इन्दीवर, राजेश कुमार, पंकज सिंह, फूलदेव पटेल, नीतीश कुमार, शम्भू सिंह, चान्द्केवारी के मुखिया विनोद साह, सकलदेव दास, संजय कुमार, हसरत अली आदि मौजूद थे.
रविवार, 24 मार्च 2013
सोमवार, 18 मार्च 2013
महिला दिवस के दिन मिला भाषण देने का मौका
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| विचार व्यक्त करतीं रिंकू कुमारी |
अप्पन समाचार की खुशबू कुमारी, रेनू कुमारी और प्रियंका कुमारी ने कार्यक्रम को कवर किया।
ख़बरों की दुनिया में किशोरियों की धमक
| समाचार संकलन करतीं काँटी स्थित केजीवीबी की किशोरियां |
| समाचार संकलन करतीं काँटी स्थित केजीवीबी की किशोरियां |
| गायघाट केजीवीबी में प्रशिक्षण प्राप्त करतीं किशोरियां |
गुरुवार, 14 मार्च 2013
अप्पन समाचार की रिंकू को एसपी सिंह पत्रकारिता पुरस्कार
अप्पन समाचार की रिंकू कुमारी को एसपी सिंह पत्रकारिता पुरस्कार से नवाजा जा
रहा है. यह घोषणा १३ मार्च को पटना पुस्तक मेला के उद्घाटन के मौके पर बिहार
के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में की गयी। यह सम्मान २२ मार्च को
पुस्तक मेला में ही हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ नामवर
सिंह देंगे।
सोमवार, 4 मार्च 2013
गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013
जिंदगी की जंग जीत लेंगे हम
- स्नेहलता उर्फ़ इंदुरानी
मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत मीनापुर प्रखंड के मानिकपुर गाँव की साहसी,
बहादूर महिला बच्ची देवी पर यह उक्ति चरितार्थ होती है। बच्ची देवी उस
व्यक्तित्व का नाम है, जिसने विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। समय
के क्रूर थपेड़े ने भी उसे नहीं डिगाया। तीन-तीन मासूमों को उसके गोद में
डाल पति काल के गाल में समा गए। चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा। पति द्वारा
छोड़े गए बंजर जमीन और लीची की बागवानी को उसने पूंजी बनाई और चल पड़ी अपनी
मंजिल की ओर। आज वह स्वयं खेतों में काम करती है, अनाज उपजाती हैं,
सब्जियों की खेती करती हैं। आज वह झोपड़ी में नहीं, ईंट का पक्का मकान उसके
पास है। अनाजों से भरा पूरा भंडार है। उसके बच्चे निजी स्कूल में पढ़ने जाते
हैं। उसके पास सब कुछ है केवल घमंड छोड़कर। उसने अपने काम को कभी प्रतिष्ठा
नहीं बनाया। वह सब्जी लेकर हाट-बाजार स्वयं जाती हैं। सभी प्रकार के लेन
-देन का काम स्वयं करती है। समाज के लोग भी उसकी हिम्मत की दाद देते हैं।
उसके द्वारा उठाये गए कदमों की प्रशंसा करते हैं। सच ! वह शक्तिस्वरूपा
देवी है। हम कमजोर नारियों के लिए आदर्श हैं। जिंदगी के जंग में सफल
होनेवाली इस देवी को शत-शत नमन!
(स्नेहलता केजीबीवी में
शिक्षिका हैं। हमने इनके लिखे लेख को हूबहू प्रकाशित किया है। अप्पन समाचार
की ओर से इन्हें एवं स्कूल की छात्राओं को लगातार मीडिया का प्रशिक्षण
दिया जा रहा है। )
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