मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

अब परदे पर गाँव का चैनल

Team of 'Next Story' interviewing Mr. Santosh Sarang, Creator of Appan Samachar
नेक्सट स्टोरी अप्पन समाचार पर ५० मिनट की फिल्म बना रहा है. मई में शूटिंग के सिलसिले में नेक्सट स्टोरी के कुंदन जी अपनी टीम के साथ मुजफ्फरपुर में तीन दिन ठहरे. अभी चार दिन पहले फिल्म की फाईनल शूटिंग हुई है. कुंदन जी की पहाड़ पुरुष दशरथ मांझी के ऊपर बनी एक फिल्म पटना में आयोजित पटना फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हुई. उनके साथ बिताये क्षण को भूल नहीं सकता. संभावना हैं कि अप्पन समाचार पर बन रहीं फिल्म जनवरी-फ़रवरी तक आएगी.  

गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

अप्पन समाचार पर किताब


Writer Subodh Kumar with Ashawani, trainee reporter of Appan Samachar

पत्रकार सुबोध कुमार अप्पन समाचार पर किताब लिख रहे हैं. इसी सिलसिले में वे अखबार की नौकरी की व्यस्तता के बीच समय निकाल कर ९ दिसंबर को अप्पन समाचार के प्रणेता संतोष सारंग के साथ चान्द्केवारी गए. वहां के ग्रामीण परिवेश का अवलोकन किया. उन्होंने अप्पन समाचार से जुडी खुशबू, अनीता, आश्वनी से चैनल के काम, अनुभव आदि पर लम्बी बातचीत की. ग्रामीण पत्रकारिता और अप्पन समाचार का मॉडल को केंद्र में रखकर यह किताब लिख रहे हैं.  

मंगलवार, 26 अक्टूबर 2010

अप्पन समाचार पर फिल्म..

अप्पन समाचार ग्राम चान्द्केवारी में आपका स्वागत है.

शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

अप्पन समाचार की फायरब्रांड टीम

एंकरिंग करती खुशबू
  • खुशबू ग्रामीण लड़कियों का सामुदायिक चैनल "अप्पन समाचार" के लिए एंकरिंग व रिपोर्टिंग करती हैं. सत्रह वर्षीय खुशबू दूरस्थ दियारा क्षेत्र की उन फायरब्रांड ग्रामीण लड़कियों में एक हैं, जिसने घर की दहलीज को लांघकर अपने नाजुक हाथों में कैमरा थामा है. गाँव की गरीबी, अशिक्षा, किसानों का दर्द, कल्याणकारी योजनाओं में व्याप्त रिश्वतखोरी को अपने कैमरे में कैद कर समुदाय के सामने उसे उजागर किया है. आज वह गाँव की कमजोर औरतों एवं उपेक्षित समुदाय की आवाज बनी हुई हैं. इसने मिशन आई द्वारा आयोजित चार 'ग्रामीण मीडिया कार्यशाला' में भाग लेकर विजुअल मीडिया की बारीकियों को तो सिखा ही है, गत साल रांची जाकर छः दिवसीय 'वृतचित्र कार्यशाला' में भी भाग लेकर वृतचित्र बनाने का गुर सीखा. खुशबू अप्पन समाचार की उस टीम में भी शामिल थीं, जो २००८ में कोसी में आई बाढ़ की त्रासदी को कवर करने सहरसा और सुपौल गई थीं. बाढ़ का इतना रौद्र रूप खुशबू ने अपने जीवन में पहली बार देखी थी. बाढ़ कवर करने आये जनसत्ता के प्रसून लतांत और एनड़ीटीवी के अजय कुमार ने  इन लड़कियों के जज्बे की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाए थे. खुशबू चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं. इसका जन्म एक किसान परिवार में २७ मई १९९३ को बिहार के मुजफ्फरपुर जिलान्तर्गत साहेबगंज प्रखंड के हुस्सेपुर परनी छपरा गाँव में हुआ था. स्नातक पास पिता शशिभूषण कुमार किसानी करते हैं तो मैट्रिक पास मां पूनम देवी घर-गृहस्थी संभालती हैं. मां आंगनबाड़ी सेविका भी हैं. खुशबू अभी पास के ही एक कॉलेज स्वर्गीय नवल किशोर सिंह इंटर कॉलेज की आईए अंतिम वर्ष की छात्र है. वह मैट्रिक गाँव के एक स्कूल राजकीयकृत उच्च विद्यालय, धरफरी से प्रथम श्रेणी (६४.४%) से उतीर्ण की. खुशबू सिलाई-कढ़ाई तो जानती ही हैं. साथ ही, अपने पैरों पर खड़े होने के लिए गाँव के एक निजी स्कूल में भी पढ़ाना शुरू किया है. वह बताती हैं कि अप्पन समाचार के लिए काम करते हुए मीडिया में ही कैरियर बनाने का लक्ष्य रखा हैं. इसी उद्देश्य से वह कंप्यूटर भी सिखाना शुरू कर दी है. क्रिकेट देखना व पढ़ाना उसका शौक है. खुशबू आगे बताती हैं कि अप्पन समाचार से जुड़ने के बाद मेरी सोच काफी बदल गई है. मैं संकीर्ण विचारों से ऊपर उठकर समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ, विधवा महिलायों, गरीबों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ कुछ करना चाहती हूँ. आगे मैं खुद को एक पत्रकार के रूप में देखना चाहती हूँ. खुशबू के माता-पिता भी अपने बेटी की सोच, लगन व कामयाबी पर गर्व करते हैं. अपनी बेटी में आये  बदलाव का श्रेय अप्पन समाचार को देते हैं. खुशबू, तुम्हें सलाम!

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

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1. Dipesh Chandra : 
Dipesh Chandra
Dipesh Chandra is a Delhi based Independent Filmmaker. He pursuing Bachelors in Journalism & Mass Communication from Guru Govind Singh Indraprasta University, Delhi. He worked as an assistant director/fixer/researcher for movie prisms of light, With Irish film maker Yolanda barker for feature length documentary prisms of light, 82 minutes documentary (its under post production now ) in London. Mr. Dipesh Chandra also worked with American filmmaker Nadeem uddin as fixer and researcher for Ganges project (film focusing environmental problem) .(under production it will go for few years more). He worked with Mr. Uddin on a documentary on Bauls; Movie about “baul tribes” especially their traditional music which is in danger to die and worked as an assistant director (1)for national channel of India (DD K SRINAGAR). Mr. Chandra directed and produced all festive documentary for national channel of India (DD K SRINAGAR). He (along his creative team ) filmed kumbh mela 2010 and its under post production.