शनिवार, 19 जनवरी 2013

आप देख रहे हैं अप्पन समाचार बुलेटिन

   
17 जनवरी 2013 को रामलीला गाछी हाट में अप्पन समाचार बुलेटिन की स्क्रीनिंग हुई। देखिये कैमरे की नजर से-

सोमवार, 14 जनवरी 2013

स्कूली छात्राओं में मीडिया की समझ

Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya, Bochahan, Muzaffarpur
Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya, Bochahan, Muzaffarpur
अप्पन समाचार और मिशन आई महिला समाख्या के सहयोग से मुजफ्फरपुर में संचालित 16 कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय में नागरिक पत्रकारिता का प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। यह कार्यक्रम 5-6 महीने से चलाया जा रहा है। करीब 1600 दलित, महादलित और पिछड़ी बिरादरी की बालिकाओं के साथ लेखन और कैमरा चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। अप्पन समाचार के संस्थापक सदस्य और कार्यक्रम समन्वयक अमृतांज इन्दीवर इन बच्चिओं को मीडिया की बारीकिओं से अवगत करा रहे है। ये लड़कियाँ अब पीटीसी करती हैं, कैमरा चलती हैं, साक्षात्कार लेती हैं, योजनाओं के बारे में बहुत कुछ जान रही है। मिडिया क्या होता है, इन बालिकाओं को जानकारी है।

गुरुवार, 10 जनवरी 2013

अप्पन समाचार की खुशबू का लेख चरखा में

अप्पन समाचार की लड़कियों के लिखे लेख अब दूसरी पत्र -पत्रिकाओं में भी प्रकाशित होने लगे हैं। अप्पन समाचार की एंकर खुशबू के लेख चरखा की पत्रिका "RURAL VOICES"  के  अक्टूबर-दिसंबर 12 के अंक में प्रकाशित हुआ है। यह अप्पन समाचार की सफलता है। गाँव की लड़कियाँ भी बड़े अखबारों और पत्रिकाओं में छपने लगी हैं।

शनिवार, 5 जनवरी 2013

अप्पन समाचार को मिला प्रोजेक्टर

एआरडी जर्मन टीवी के एशिया ब्यूरो संजय कुमार जी ने अप्पन समाचार को एक प्रोजेक्टर डोनेट किया है। गत धनतेरस के दिन पटना में संजय जी ने अप्पन समाचार के संतोष सारंग को यह प्रोजेक्टर दिया। संजय जी ने अप्पन समाचार को आगे ले जाने के लिए कई सुझाव दिए। संजय कुमार जी अप्पन समाचार के सम्पादकीय सलाहकार भी हैं। अप्पन समाचार की पूरी टीम संजय जी के इस बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद् के साथ ढेरों शुभकामनाएं दीं। आपको बता दें कि अप्पन समाचार के पास गत तीन सालों से प्रोजेक्टर नहीं होने के कारण यह आन्दोलन धीमी पर गया था। प्रोजेक्टर मिलते ही इस मिडिया आन्दोलन को गति मिलने लगी है।